सोमवार, 17 सितंबर 2018

धात्रीफल, Dhatriphala

                 धात्रीफल
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धात्रीफल का पाउडर ( चूर्ण  ) का उपयोग   करने से जलन एसिडिटी की, अम्लपित्त  की जलन, में बहुत लाभ होता हैं तथा शरीर में कही भी दाह,जलन की शिकायत में काफी लाभ होता हैं इस को 3 से 20 ग्राम की मात्रा में  शरीर की जरूरत के मुताबिक लेना चाहिए मतलब एक चम्मच से शुरुआत की जा सकती है फिर जैसे शरीर एक्सेप्ट करता जाए वैसे ले बहुत फायदा  होता है महिलाओ की योनि की जलन तथा सफेद पानी श्वेतप्रदर में अति लाभ कारी हैं पेट भी साफ रहता हैं इस को स्वच्छ पानी से ही  लेना चाहिए
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अज्जिका, ajajika

                  अज्जिका
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ये भारत में बहुतायत में प्रयोग होने वाला हैं इस को आधे से एक चम्मच की मात्रा में लेने से अग्निमांध भोजन का आसानी से नही पचना में      सामान्य प्रयोग हैं मतलब अगर भूख  कम लगती हैं या आप खाना जबरदस्ती करते हैं तो इस को खाने से आधा से एक घंटा पहले पानी से लेने से काफी फायदा होता हैं आप की पाचन शक्ति दुरुस्त होती हैं आप का मन अच्छे से खाना खाने को करता हैं। अगर पेट में कीड़े हैं तो उन को पेट से हटा देता हैं  और अगर दस्त होते हैं तो उन को ठीक करता हैं
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शनिवार, 8 सितंबर 2018

उग्रगन्धा

                     उग्रगन्धा
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अगर किसी को माहवारी होने में बहुत दर्द होता है तो इस को एक चम्मच एक कप पानी में बारह घन्टे पानी में डाल कर रख दे उसके बाद उस पानी को इस के सहित स्टील के किसी बर्तन में डाल कर इतना उबाले की पानी 1/4 हो जाय तो ठंडा कर के पीले इस तरह महावारी शुरू होने से तीन दिन पहले शुरू करके पांच दिन तक करे फिर छोड़ दे इस तरह 3-4 माह करने से माहवारी के समय होने वाला दर्द सामान्य हो जाता हैं
अगर किसी की शराब पीने की आदत छुड़ानी हो तो इस कि दो चम्मच पानी में डाल कर उस पानी को चौथाई होने तक उबाल कर ठंडा करके उस की तीन खुराक करके सुबह दोपहर शाम कुछ दिन देने से कुछ समय में शराबी शराब पीना स्वयं छोड़ देता हैं
पेट दर्द में आधी चम्मच उग्रगन्धा तथा एक चुटकी काला नमक पानी से लेने पर तात्कालिक लाभ होता हैं।
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अक्षोट, अक्षोड

                  अक्षोड, अक्षोट
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इसके इस्तेमाल से घुटने के दर्द में तथा कोलेस्ट्रॉल में बहुत आराम मिलता हैं इस को 12 से 24 ग्राम तक सुबह शाम लेना चाहिए
इस के सेवन से शारीरिक शक्ति में भी इजाफा होता हैं तथा उसकी उमंग में भी बढ़ोतरी होती हैं स्त्री हो या पुरुष सब के इस्तैमाल के योग्य हैं
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करकरा

                         करकरा
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इस का काढ़ा बना कर शहद में मिला कर लिंग पर लगने से शीघ्रपतन में लाभदायक हैं
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शुक्रवार, 7 सितंबर 2018

ककुभ,कोह

             ककुभ ,कोह
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ककुभ या कोह के विषय में आयुर्वेद में शास्त्रोक्त रूप से लिखा गया हैं कि अगर इस को एक बर्ष तक इस्तेमाल किया जाय तो वात प्रकोपित ह्रदय रोग से मृत्यु नही होगी मतलब दिल में दर्द से जो मृत्यु जो होती हैं उस की संभावना न के बराबर हो जाती है  मतलब ये ब्लॉकेज को हटाती हैं
मतलब रक्त को सामान्य स्थिति में लाती हैं जीवन को सामान्य करती हैं वातज ह्रदय रोग के मामले में  इस को पाउडर रूप में लिया जा सकता हैं काढ़ा बना कर ले सके हैं या क्षीर पाक विधि से मतलब दूध में पकाकर ले सकते हैं।
मात्रा:- त्वक चूर्ण 1से 3ग्राम,            काढ़ा:-   23 से  46 ग्राम
क्षीर पाक में:-6 से 12 ग्राम
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अश्वत्थ पत्र

            अश्वत्थ पत्र

अश्वत्थपत्र का पीलिया रोग में काफी इस्तेमाल हैं।इस के  कोमल पत्र को लेकर पीस कर शर्बत बना कर लेने से काफी राहत होती हैं शर्बत एक दो पत्ते से अधिक का नही होना चाहिए ये शर्बत पूरे दिन के लिए उपयोग किया जाता हैं मतलब पूरे दिन के लिए एक दो पत्रो का शर्बत बना तीन बार के लिये कर लिया जाता हैं इस से अधिक नही लें अगर पत्र सूखे हैं तो उन को एक गिलास पानी में डाल कर इतना उबाल ले कि पानी चौथाई गिलास रह जाय फिर उस में मीठा मिला कर शर्बत बना लें फिर उस शर्बत के तीन खुराक कर सुबह दोपहर शाम दें अश्वत्थपत्र यहां से लें:-relaxpharmaceuticalsagra@gmail. com